Friday, 24 July 2015

Haridwar हरिद्वार

हरिद्वार ,भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित प्राचीन धार्मिक नगर है। गंगा नदी के दाहिने तट पर स्थित ये शहर सम्पूर्ण विश्व मे एक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप मे विख्यात है । गंगा नदी, अपने उदगम गोमुख से निकलकर ,हरिद्वार से ही उत्तर भारत के विशाल मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इसीलिए हरिद्वार को गंगाद्वार भी कहा गया है। हिंदु पौराणिक ग्रंथो के अनुसार , समुद्र मंथन से जो अमृत निकला था , उसकी कुछ बुँदे हरिद्वार ,उज्जैन ,नासिक और प्रयाग में गिरी थीं। इसीलिए प्रत्येक 12 वर्ष बाद , हरिद्वार मे कुम्भ मेला का आयोजन किया जाता है। प्राचीन काल मे हरिद्वार को “ मायापुरी” के नाम से भी जाना जाता था। हरिद्वार को उत्तराखंड के चारों धामो का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। धार्मिक स्थल होने के कारण यहाँ साल भर सैलानी एवं हिन्दू भक्तों का जमघट लगा रहता है । भोगोलिक दृष्टि से हरिद्वार, उत्तर मे शिवालिक और दक्षिण मे गंगा नदी के बीच समुद्र तल से करीब 314 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
“हर की पैड़ी” ,हरिद्वार के प्रमुख घाटों मे से एक है। विभिन्न हिन्दू धार्मिक त्योहारो के दोरान इस घाट पर स्नान करने की परंपरा रही है। ऐसी मान्यता है की इस घाट पर गंगा नदी मे डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। संध्या के समय यहाँ प्रतिदिन गंगा नदी की भव्य आरती की जाती है । उसके उपरांत गंगा नदी मे भक्तों द्वारा दीप प्रवाहित किए जाते है । सभी दीपों की ज्योति से पूरा तट जगमगाने लगता है ।
मनसा देवी मंदिर , बिलवा पर्वत पर स्थित है । इस मंदिर का अपना धार्मिक महत्व है। मंदिर परिसर तक पहुँचने के लिए विशेष “ रोप-वे” ट्रॉली का भी प्रबंध किया गया है। साल भर यहाँ देवी के भक्तों का तांता लगा रहता है।
“चंडी देवी मंदिर” , हर की पैड़ी से मात्र 2-3 किलोमीटर की दूरी पर नील पर्वत पर स्थित है । यहाँ पहुँचने के लिए विशेष “ रोप-वे” ट्रॉली लगाई गई है। इस मंदिर का निर्माण कश्मीर के राजा सुचात सिंह ने कराया था। ऊंचाई पर स्थित इस जगह से पूरे हरिद्वार का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
दक्ष महादेव मंदिर एवं सती कुंड भी हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों मे से एक है। यह स्थल हरिद्वार से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दक्ष महादेव का प्राचीन मंदिर पूरे भारत मे प्रसिद्ध है।
भारत माता मंदिर , एक बहुमंजिला मंदिर है , जो कई धर्मो का आस्था स्थल है। “हर की पैड़ी” से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सप्तऋषि स्थल है जहां गंगा नदी कई छोटी छोटी धाराओं मे विभाजित होती है। सैलानिओ को यह दृश्य बहुत मनोरम लगता है। यहाँ एक सप्तऋषि आश्रम भी है।
नील धारा पक्षी विहार मे भी शीत ऋतु मे कई विशेष देशी और विदेशी पक्षी देखे जा सकते हैं। इसके अलावा राजाजी नेशनल पार्क के अंतर्गत “ चीला” भी एक पर्यटन स्थल है जहां जंगली जानवरों को नजदीक से देखा जा सकता है ।गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय भी अपनी प्राचीन शिक्षा पद्धति के लिए प्रसिद्ध है। बाबा राम देव द्वारा स्थापित पतंजलि योगपीठ , भी योगकेन्द्र के रूप मे प्रसिद्ध है।https://en.m.wikipedia.org/wiki/Haridwar

उत्तराखंड की संस्कृति uttrakhand ki sanskriti

उत्तराखंड की संस्कृति'

किसी प्रदेश की संस्कृति और वहाँ रहने वाले लोगों के बीच एक अटूट सम्बन्ध होता है।प्राकृतिक विविधता एवं हिमालय का अद्वितीय सौंदर्य व् पवित्रता  'उत्तराखंड की संस्कृति' में एक नया आयाम जोड़ देते हैं।यहाँ के लोग और यहाँ की संस्कृति में भी उत्तराखंड के विविध भू दृश्य की विविधता के दर्शन होते है। उत्तराखंड की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा की जड़े मुख्य रूप से धर्म से जुड़ी हुईं हैं। संगीत ,नृत्य एवं कला यहाँ की संस्कृति को हिमालय से जोड़ती है।
उत्तराखंड की नृत्य शैली जीवन और मानव अस्तित्व से जुडी है और असंख्य मानवीय भावनाओं को प्रदर्शित करती है। "लंगविर" यहाँ की एक पुरुष नृत्य शैली है जो शारीरिक व्यायाम से प्रेरित है। "बराड़ा" देहरादून क्षेत्र का एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है, कुछ विशेष धार्मिक त्योहारों के दौरान किया जाता है। इनके अलावा हुरका बोल,झोरा-चांचरी,झुमैला,चौफुला और छोलिया आदि यहाँ के जाने माने नृत्य हैं।
संगीत उत्तराखण्ड की संस्कृति का एक अभिन्न अंग  है। मंगल,बसन्ती ,खुदेड़ आदि यहाँ के लोकप्रिय लोकगीत है। "बेडू पाको" राज्य का अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक प्राचीन लोक गीत है।
यहाँ सुन्दर चित्रकारी और भित्ति चित्र, घरों और मंदिरों दोनों को सजाने के लिए इस्तेमाल किये जाते है। पहाड़ी चित्रकला शैली 17 वीं और 19 वीं सदी के बीच इस क्षेत्र में विकसित हुई है।गुलेर राज्य कांगड़ा चित्रों का उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध था।
गढ़वाली कला ,प्रकृति के लिए अपनी निकटता के लिए जानी जाती है, जबकि कुमाऊंनी कला अक्सर प्रकृति में ज्यामितीय होती है। ऊनी शॉल, स्कार्फ, सोने के आभूषण, गढ़वाली टोकनी दस्तकारी आदि उत्तराखंड के अन्य शिल्प हैं।
उत्तराखंड का प्राथमिक खाद्य, गेहूं और सब्जियों है। हालांकि उत्तराखंड के भोजन की एक विशेषता है कि यहाँ टमाटर, दूध और दूध आधारित उत्पादों का इस्तेमाल बहुत होता है। मडुआ या झिंगोरा अनाज उत्तराखंड की एक स्थानीय फसल है जो विशेष रूप से कुमाऊं और गढ़वाल के आंतरिक क्षेत्रों में होती है। "बाल मिठाई" यहाँ का एक लोकप्रिय व्यंजन है।दुबूक ,काप,गुलगुला ,सेई आदि यहाँ के अन्य लोकप्रिय व्यंजन है।

उत्तराखंड धार्मिक और आध्यात्मिक सभी वर्गों के लिए यात्रा-विकल्प प्रदान करता है।
हिंदु पौराणिक ग्रंथो के अनुसार , समुद्र मंथन से जो अमृत निकला था , उसकी कुछ बुँदे हरिद्वार ,उज्जैन ,नासिक और प्रयाग में गिरी थीं। इसीलिए प्रत्येक 12 वर्ष बाद , हरिद्वार मे कुम्भ मेला का आयोजन किया जाता है। संध्या के समय यहाँ प्रतिदिन गंगा नदी की भव्य आरती की जाती है । उसके उपरांत गंगा नदी मे भक्तों द्वारा दीप प्रवाहित किए जाते है । सभी दीपों की ज्योति से पूरा तट जगमगाने लगता है । 
इस प्रकार उत्तराखंड की संस्कृति अपने अंदर हिमालय और गंगा नदी के अदभुत सौंदर्य को समेटे हुए, आज भी प्राचीन धार्मिक परम्पराओ को सहेजे हुए है।

Thursday, 16 July 2015

उत्तराखंड की प्रकृति

उत्तराखंड प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। यह प्रदेश, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और तीर्थ केंद्रों के लिए प्रसिद्ध है। आप को यहां अंतहीन प्राकृतिक सुंदरता के अभूतपूर्व दर्शन होंगे। 'पहाड़ों की रानी'  मसूरी,'लेक डिस्ट्रिक्ट' नैनीताल, 'भारत का स्विट्जरलैंड' कौसानी ,देहरादून ,रानीखेत, पिथौरागढ़, और पौड़ी आदि  प्रकृति प्रेमियों के लिए प्रकृति का उपहार समान है।
गंगा और यमुना नदी के बीच स्थित देहरादून से हिमालय पर्वतमाला बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है।नैनीताल, समुद्र स्तर से 1938 मीटर ऊंचाई पर एक घाटी में प्रसिद्ध नैनी झील के चारों ओर स्थित है। प्रकृति के साथ एक खास मुलाकात के लिए यह एक खूबसूरत जगह है।मसूरी, 'पहाड़ों की रानी'  बर्फ से ढके हिमालय की चोटियों के साथ एक अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य प्रस्तुत करती है।अल्मोड़ा ,रानीखेत ,कौसानी ,पिथौरागढ  का अदभुत प्राकृतिक सौंदर्य सभी प्रकृति प्रेमियों को अभिभूत कर देता है।

उत्तराखंड का उत्तरी भाग अधिकांशतः उच्च हिमालय की चोटियों और ग्लेशियरों से आच्छादित है। हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण व पावन नदियों में से दो,  गंगोत्री में गंगा और यमुनोत्री में यमुना इसी प्रदेश से आरंभ होती हैं।बंगाल टाइगर जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में भी पाया जाता है जो भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है।फूलों की घाटी,  गढ़वाल क्षेत्र में जोशीमठ के पास भ्युन्दर गंगा के ऊपरी विस्तार में स्थित, एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है। यह घाटी इसके फूलों और पौधों की विविधता और दुर्लभता के लिए जानी जाती है।
हिमालय की पारिस्थितिकी तंत्र अनेक पौधों ,दुर्लभ जड़ी बूटियों और भारल, हिम तेंदुए, तेंदुए और बाघों सहित कई जानवरों के लिए निवास स्थान प्रदान करता है।
उत्तराखंड हिमालय रेंज के दक्षिणी ढाल पर स्थित है और यहाँ की जलवायु और वनस्पति ऊंचाई के साथ साथ परिवर्तित भी होती है।यहाँ कम ऊंचाई पर उपोष्णकटिबंधीय जंगल है तो सर्वोच्च ऊंचाई पर ग्लेशियर हैं।

इस प्रकार उत्तराखंड,  प्राकृतिक सौंदर्य का एक ऐसा स्वर्ग है जो आपको मंत्रमुग्ध कर देगा और आप यहाँ अपने आप को प्रकृति की गोद में पाएंगे।

Sunday, 12 July 2015

Review of baahubali in hindi

फिल्म: बाहुबली
स्टार कास्ट: प्रभास, राणा दग्गुबति ,तमन्ना , अनुष्का शेट्टी, नासिर, सत्यराज निर्देशक: एस.एस .राजामौली
रेटिंग: 3.5/5

 निर्देशक एस.एस .राजामौली की फ़िल्म Baahubali बाहुबली ,अदभुत स्पेशल इफ़ेक्ट  और शानदार दृश्यों  से भरपूर एक एक महाकाव्य है।